आज 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन सूर्य देव के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने और उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है, जो देवताओं का दिन माना जाता है। इस वर्ष यह पर्व विशेष रूप से शुभ है क्योंकि कई दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं, जैसे सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग (सुबह 7:15 बजे से अगले दिन सुबह 3:03 बजे तक), साथ ही षटतिला एकादशी का संयोग और सूर्य-शुक्र की युति। इन योगों में किया गया स्नान, दान और पूजा कई गुना पुण्य प्रदान करता है।
शुभ मुहूर्त और महत्वपूर्ण समय (अगस्त/उत्तर भारत के अनुसार, स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें):
ब्रह्म मुहूर्त (स्नान के लिए सर्वोत्तम): सुबह 5:27 बजे से 6:21 बजे तक।
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (संक्रांति मोमेंट): दोपहर लगभग 3:07 से 3:13 बजे के आसपास।
पुण्य काल / महा पुण्य काल (स्नान-दान का मुख्य समय): दोपहर 3:13 बजे से शाम 4:58 बजे या 5:45 बजे तक (कुछ स्रोतों में शाम 5:46 बजे तक)। इस दौरान स्नान, सूर्य अर्घ्य, दान और पूजा विशेष फलदायी होती है।
कुछ परंपराओं में पुण्य काल सुबह से शुरू होकर शाम तक माना जाता है, लेकिन मुख्य महा पुण्य काल संक्रांति के बाद का होता है।
स्नान-दान का महत्व और विधि:
मकर संक्रांति पर पवित्र नदी (जैसे गंगा, यमुना) में स्नान से पाप नाश होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। यदि नदी संभव न हो तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के दौरान तिल युक्त जल का उपयोग करें और मंत्र जपें:
स्नान मंत्र: ॐ आपो हि ष्ठा मयोभुवः… (या सूर्य मंत्र: ॐ घृणि सूर्याय नमः)।
दान का विशेष महत्व है – तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल, वस्त्र, अन्न, तेल आदि दान से अक्षय पुण्य मिलता है। दान पुण्य काल में करें, जरूरतमंदों या ब्राह्मण को दें।
पूजा विधि (सूर्य देव की उपासना):
प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें।
सूर्य देव की ओर मुख करके जल, अक्षत, फूल, गुड़-तिल से अर्घ्य दें।
सूर्य मंत्र जप: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः (108 बार या जितना संभव)।
सूर्य चालीसा या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
खिचड़ी बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें (तिल-गुड़ मिलाकर)।
परिवार सहित दान-पुण्य करें और पतंग उड़ाएं (उत्तर भारत में लोकप्रिय)।
