देहरादून। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून ने वायरल हेपेटाइटिस के प्रति लोगों को जागरूक करने और समय पर जांच, टीकाकरण, जल्दी पहचान, उचित इलाज तथा बचाव के उपाय अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस वर्ष की आधिकारिक थीम “Hepatitis: Let’s Break It Down” लोगों से हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच कराने, बचाव, इलाज और बेहतर देखभाल तक पहुंच में आने वाली बाधाओं को दूर करने का संदेश देती है। साथ ही यह वायरल हेपेटाइटिस के पांचों प्रकार – हेपेटाइटिस A, B, C, D और E – के बारे में सही जानकारी बढ़ाने पर भी जोर देती है।
वायरल हेपेटाइटिस आज भी दुनिया भर में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है और यह लंबे समय तक रहने वाली लिवर की बीमारियों, लिवर सिरोसिस तथा लिवर कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है। हेपेटाइटिस A, B और E से बचाव के लिए प्रभावी टीके उपलब्ध हैं, जबकि हेपेटाइटिस C का इलाज अब आधुनिक एंटीवायरल दवाओं से संभव है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में संक्रमित लोगों को अपनी बीमारी के बारे में पता ही नहीं चलता, क्योंकि शुरुआती चरण में यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। ऐसे में कई बार तब तक काफी देर हो चुकी होती है और लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच चुका होता है। इसलिए समय पर जांच और जल्दी बीमारी की पहचान करना जटिलताओं से बचने और बेहतर इलाज के लिए बेहद जरूरी है।
वायरल हेपेटाइटिस के अलग-अलग प्रकार अलग-अलग तरीकों से फैलते हैं। हेपेटाइटिस A और E आमतौर पर दूषित भोजन और गंदे पानी के माध्यम से फैलते हैं, जबकि हेपेटाइटिस B, C और D संक्रमित खून तथा शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क से फैलते हैं। अच्छी व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना, सुरक्षित भोजन और साफ पीने का पानी इस्तेमाल करना, असुरक्षित इंजेक्शन से बचना, जांचे हुए रक्त का ही रक्त चढ़ाना (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) और डॉक्टर की सलाह के अनुसार टीकाकरण करवाना संक्रमण से बचाव के सबसे प्रभावी उपायों में शामिल हैं।
वायरल हेपेटाइटिस के सामान्य लक्षणों में लगातार थकान रहना, भूख कम लगना, मतली या उल्टी, पेट में दर्द या असहजता, बुखार, त्वचा और आंखों का पीला पड़ जाना (पीलिया), पेशाब का गहरा रंग होना, मल का हल्के रंग का होना तथा बिना किसी कारण वजन कम होना शामिल हैं। हालांकि कई लोगों में महीनों या कई वर्षों तक कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि जिन लोगों में जोखिम अधिक है या जिनके परिवार में लिवर की बीमारी का इतिहास है, उनके लिए नियमित जांच करवाना बहुत जरूरी है।
इस अवसर पर डॉ. मयंक गुप्ता, प्रिंसिपल कंसल्टेंट – गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून ने कहा, “वायरल हेपेटाइटिस को नियंत्रित करने की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि अधिकांश संक्रमित लोगों को अपनी बीमारी का पता तब चलता है, जब उनके लिवर को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है। अच्छी बात यह है कि वायरल हेपेटाइटिस से काफी हद तक बचाव संभव है और इसके कई प्रकारों का समय पर पहचान होने पर प्रभावी इलाज भी उपलब्ध है। लोगों में जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच को बढ़ावा देना, टीकाकरण का दायरा बढ़ाना और सभी तक उचित इलाज की पहुंच सुनिश्चित करना लिवर की बीमारियों का बोझ कम करने और वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने के वैश्विक लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।”
उन्होंने आगे कहा, “वायरल हेपेटाइटिस से बचाव की शुरुआत कुछ आसान लेकिन प्रभावी उपायों से होती है, जैसे व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना, सुरक्षित भोजन और साफ पानी का सेवन करना, असुरक्षित इंजेक्शन से बचना, डॉक्टर की सलाह के अनुसार हेपेटाइटिस A और B के टीके लगवाना तथा किसी भी लक्षण या जोखिम की स्थिति में समय पर डॉक्टर से सलाह लेना। इसके साथ ही हेपेटाइटिस से जुड़े सामाजिक संकोच और गलत धारणाओं को भी दूर करना जरूरी है, क्योंकि डर और गलत जानकारी के कारण कई लोग समय पर जांच और इलाज नहीं कराते। यदि हम लोगों में सही जानकारी बढ़ाएं और उन्हें जागरूक स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने के लिए प्रेरित करें, तो हम इस बीमारी के लंबे समय तक रहने वाले दुष्प्रभावों से व्यक्ति, परिवार और समाज सभी की रक्षा कर सकते हैं।”
विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून सभी लोगों से अपील करता है कि वे अपने लिवर के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, वायरल हेपेटाइटिस के जोखिमों को समझें, इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानें और जरूरत पड़ने पर बिना देरी किए डॉक्टर से परामर्श लें। अधिक जागरूकता, बचाव के उपाय, समय पर जांच, टीकाकरण और सभी तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की समान पहुंच के माध्यम से वायरल हेपेटाइटिस को रोका जा सकता है, इसका प्रभावी इलाज संभव है और भविष्य में इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़े खतरे के रूप में पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
