जोशीमठ : जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को पत्र लिखकर जोशीमठ में चल रहे भू-धंसाव रोधी एवं भू-तकनीकी स्थिरीकरण कार्यों में व्यापक अनियमितताओं और गुणवत्ता मानकों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। समिति के संयोजक अतुल सती ने NDMA के निदेशक को भेजे पत्र में मांग की है कि जांच पूर्ण होने तक संबंधित फर्मों और ठेकेदारों का भुगतान तत्काल रोका जाए और उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए।
पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2023 की आपदा के बाद जोशीमठ की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार ने ₹1,640 करोड़ स्वीकृत किए थे। लेकिन धरातल पर हो रहे कार्यों में माइक्रो-पाइलिंग, एंकरिंग, सोइल नेलिंग और ड्रेनेज प्रबंधन में सामग्री मानकों की अनदेखी की जा रही है। DPR और BOQ में तय विनिर्देशों का उल्लंघन किया जा रहा है। समिति का आरोप है कि बिना किसी पारदर्शी गुणवत्ता जांच और थर्ड-पार्टी ऑडिट के ही कार्यदायी संस्थाओं को भुगतान किया जा रहा है, जिससे सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की आशंका है।
संघर्ष समिति ने NDMA से मांग की है कि IIT, CBRI या किसी अन्य निष्पक्ष केंद्रीय तकनीकी संस्थान के विशेषज्ञों और स्थानीय प्रतिनिधियों की संयुक्त टीम बनाकर सभी कार्यों की भौतिक एवं तकनीकी ऑडिट कराई जाए। साथ ही स्थानीय हितधारकों को शामिल कर एक आधिकारिक मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया जाए। समिति ने यह भी कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई हो और घटिया कार्यों को ठेकेदारों की लागत पर पुनः करवाया जाए।
पत्र में ड्रेनेज और सीवेज व्यवस्था के लिए पूरे नगर को शामिल कर बजट बढ़ाने, प्रभावितों के पूर्ण पुनर्वास और मुआवजा भुगतान में तेजी लाने की मांग भी की गई है। इसके अलावा IIT रुड़की द्वारा डिजाइन किए गए भवन निर्माण स्ट्रक्चर को मंजूरी देकर लागू करने का अनुरोध किया गया है, ताकि प्रभावित लोग अपने घरों का निर्माण कर सकें।
समिति ने कहा कि जोशीमठ सामरिक और सांस्कृतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है और यहां के नागरिकों की सुरक्षा इस परियोजना की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। पत्र की प्रतिलिपि उत्तराखंड के मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन सचिव और जिलाधिकारी चमोली को भी भेजी गई है।
