- पौड़ी के क्यार्क गांव के दीपक ने 30 नाली में विकसित किया फल उत्पादन का फार्म, 250 कीवी और 400 सेब के पौधों से संवार रहे स्वरोजगार की राह
पौड़ी। पहाड़ों में रोजगार की तलाश में युवाओं का पलायन आम चुनौती है, लेकिन कुछ युवा अपनी मेहनत और नवाचार से इसी पहाड़ में आजीविका के नए रास्ते खोल रहे हैं। पौड़ी के क्यार्क गांव निवासी दीपक नौटियाल इसकी मिसाल हैं। दिल्ली और यूरोप में नौकरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 2021 में बैंजवाड़ी में 30 नाली भूमि पर फल उत्पादन का फार्म शुरू किया। कीवी को मुख्य फसल बनाते हुए उन्होंने सेब, पुलम, एप्रिकॉट, नींबू और माल्टा सहित कई फलों की बागवानी विकसित की। उनका यह प्रयास अब केवल फल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला स्वयं सहायता समूहों, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मार्केटिंग को जोड़कर ग्रामीण आजीविका के अवसर भी तैयार कर रहा है।
250 कीवी और 400 सेब के पौधों से सजा फार्म
दीपक ने शुरुआत में कीवी के 50 पौधे लगाए थे। वर्ष 2022 में उन्होंने पौधों की संख्या बढ़ाई और अब उनके फार्म में कीवी के करीब 250 पौधे हैं। इसके अलावा सेब के 400 तथा नींबू-माल्टा के लगभग 150 पौधे लगाए गए हैं। फार्म में अन्य फलों का उत्पादन भी किया जा रहा है। दीपक के मुताबिक, यहां एक सीजन में करीब 18 क्विंटल कीवी का उत्पादन होता है और इसकी तुड़ाई अक्टूबर में की जाती है।
बागवानी को विस्तार देने के लिए उन्होंने उद्यान विभाग से 80 प्रतिशत सब्सिडी के तहत सहयोग लिया। सिंचाई के लिए विभाग ने टैंक उपलब्ध कराया, जबकि कृषि विभाग की ओर से फार्म में घेरबाड़ की गई। सरकारी योजनाओं से मिले सहयोग और अपने प्रयासों के जरिए उन्होंने फल उत्पादन को व्यवस्थित रूप दिया है।
फल उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण तक महिला समूहों की भागीदारी
दीपक नौटियाल ने अपने फार्म को स्थानीय महिलाओं की आजीविका से भी जोड़ा है। फार्म से प्राप्त कीवी और अन्य फलों की सफाई तथा प्रसंस्करण से जुड़े कार्यों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी है। महिलाएं बुरांश, जैम, चटनी, अचार और बिस्किट सहित विभिन्न उत्पाद तैयार करती हैं। इसके बाद उत्पादों की पैकेजिंग दिल्ली में की जाती है और उन्हें बाजार तक पहुंचाया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया से पौड़ी के करीब 10 से 12 महिला स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं। इनके माध्यम से लगभग 120 महिलाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। इस पहल से स्थानीय कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने के साथ महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु तक पहुंच रहे उत्पाद
फार्म के उत्पादों की बिक्री के लिए दीपक ने ‘रंगीलो छबीलो ग्रुप’ के माध्यम से ऑनलाइन मांग और मार्केटिंग की व्यवस्था की है। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सहित देश के विभिन्न शहरों से उत्पादों की मांग आती है। कुछ उत्पाद यूरोप तक भी पहुंचाए जाते हैं। मार्केटिंग के काम में करीब 22 लोगों की टीम जुड़ी हुई है।
उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन तक की इस व्यवस्था ने स्थानीय संसाधनों को बाजार से जोड़ने का रास्ता तैयार किया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
सीजन में 10 से 15 लोगों को मिलता है काम
दीपक के अनुसार, सामान्य दिनों में फार्म में चार लोग काम करते हैं, जबकि सीजन के दौरान 10 से 15 लोगों को रोजगार मिलता है। वह खेती और बागवानी को बाजार से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अधिक अवसर विकसित करना चाहते हैं। फार्म में बिना दवाइयों के उत्पादन पर भी जोर दिया जा रहा है।
पहाड़ की जमीन पर फल उत्पादन से शुरू हुआ दीपक नौटियाल का यह प्रयास अब महिला समूहों, उत्पाद प्रसंस्करण और बाजार प्रबंधन को एक साथ जोड़ रहा है। उनका मॉडल दर्शाता है कि स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग, विविध फल उत्पादन और बाजार तक सीधी पहुंच ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

