Home उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने अक्षरधाम के स्वामी भद्रेश दास से की शिष्टाचार भेंट, संस्कृत के वैश्विक प्रचार-प्रसार पर हुई चर्चा

संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने अक्षरधाम के स्वामी भद्रेश दास से की शिष्टाचार भेंट, संस्कृत के वैश्विक प्रचार-प्रसार पर हुई चर्चा

by apnagarhwal.com

देहरादून/दिल्ली : उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन सचिव दीपक कुमार ने प्रतिष्ठित संस्कृत विद्वान, दार्शनिक एवं आध्यात्मिक चिंतक स्वामी भद्रेश दास से शिष्टाचार भेंट की। स्वामी भद्रेश दास को के. के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रतिष्ठित सरस्वती सम्मान तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक महत्वपूर्ण सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

भेंट के दौरान दीपक कुमार ने अक्षरधाम में आयोजित विशेष समारोह में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा स्वामी भद्रेश दास को प्रदान किए गए ‘वेदविद्याविश्वगुरु’ पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने संस्कृत तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार में स्वामी भद्रेश दास के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की।

उत्तराखंड के लिए 10 अगस्त के विशेष महत्व को रेखांकित करते हुए दीपक कुमार ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश के सभी 13 जिलों में स्थापित 13 संस्कृत ग्रामों के माध्यम से संचालित संस्कृत संवर्धन अभियान के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राज्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य जमीनी स्तर पर संस्कृत के अध्ययन, प्रयोग और प्रचार-प्रसार को सुदृढ़ करना है। उल्लेखनीय है कि संस्कृत को उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा का गौरव प्राप्त है।

दीपक कुमार ने आगे बताया कि प्रस्तावित उत्तराखंड संस्कृत आयोग, जिसका गठन शीघ्र किए जाने की संभावना है, राज्य में संस्कृत के समग्र विकास एवं संवर्धन के लिए एक व्यापक संस्थागत ढांचा प्रदान करेगा। प्रस्तावित आयोग का उद्देश्य युवा विद्यार्थियों की आकांक्षाओं को संस्कृत के विशाल शास्त्रीय साहित्य, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा उच्च शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के समकालीन अवसरों से जोड़ना होगा।

भेंट के दौरान स्वामी भद्रेश दास ने आगामी महीनों में उत्तराखंड आने तथा उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्कृत के प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों से संवाद करने की अपनी इच्छा व्यक्त की। उन्होंने संस्कृत ग्रामों से जुड़े विद्यार्थियों एवं लाभार्थियों से भी संवाद करने तथा संस्कृत सीखने और उसके प्रयोग से जुड़े उनके अनुभवों को जानने में रुचि व्यक्त की।

स्वामी भद्रेश दास ने यह भी बताया कि स्वामिनारायण रिसर्च इंस्टीट्यूट उत्तराखंड के विभिन्न संस्कृत संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन करने के लिए इच्छुक है। इन समझौता ज्ञापनों के माध्यम से शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ करने तथा राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर संस्कृत के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

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